🍁🌸।।कबीर साहेब की जानकारी।। 🍁🌸
भारत के महान संत और आध्यात्मिक कवि स्वयं भगवान थे , और है भी,,,
अनेक प्रमाणिक तथ्यों के साथ सिद्ध करेगे की कबीर जी स्वयं भगवान है, पूरी श्रष्टि के मालिक है, वो अपने आप को छुपाकर रखते है, उनको ज्ञान आधार से पहचाना जा सकता है।।।
इस्लाम के अनुसार ‘कबीर’ का अर्थ महान होता है। कबीर पंथ एक विशाल धार्मिक समुदाय है ।
कबीर पंथ के लोग को कबीर पंथी कहे जाते है जो पूरे उत्तर और मध्य भारत में फैले हुए है। संत कबीर के लिखे कुछ महान रचनाओं में बीजक, कबीर ग्रंथावली, अनुराग सागर, सखी ग्रंथ आदि है। ये स्पष्ट नहीं है कि उनके माता-पिता कौन थे लेकिन ऐसा सुना गया है कि उनकी परवरिश करने वाला कोई बेहद गरीब मुस्लिम बुनकर परिवार था। कबीर बेहद धार्मिक व्यक्ति थे और एक महान सन्त के रूप के जाने जाते है, और भगवान तो वो है ही।।
कबीर जी के दोहे:::::::::--
जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नहीं
सब अंधियाँरा मिट गया, जब दीपक देखया महीन”
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर”
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिला कोय
जो मन देखा आपना, मुझसे बुरा ना कोय”
“गुरु गोविन्द दोहू खड़े, कागे लागू पाँय
बलीहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय”
“सब धरती कागज कारु, लेखनी सब वनराय
सात समुन्द्र की मासी कारु, गुरुगुन लिखा ना जाय”
“ऐसी वानी बोलिये, मन का आपा खोय
औरन को शीतल करुँ, खुद भी शीतल होय”
“निंदक नियरे राखिये, आँगन कुटी छवाय
बिन पानी बिन साबुन, निर्मल करे सुभाय”
“दुख में सिमरन सब करे, सुख में करे ना कोय
जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय”
“माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंधे मोहे
एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रौंधुगी तोहे”
“चलती चक्की देखकर, दिया कबीरा रोय
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोय”
“मालिन आवत देख के, कलियाँ करे पुकार
फूले फूले चुन लिये, काल हमारी बार”
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में परलय होयेगी बहुरी करेगा कब”
“पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय
ढ़ाई अक्षर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय”
“साईं इतना दीजीये, जा में कुटुम्ब समाय
मैं भी भूखा ना रहूँ, साधू ना भूखा जाय”
*रामानंद जी के मन की बात जानना*
रामानंद जी प्रतिदिन विष्णु की मानसिक मूर्ति बनाकर कर्म कांड करके पूजा करते थे। एक दिन वे भगवान विष्णु जी को स्नान कराकर मुकुट पहना दिया और गले में कंठी डालना भूल गए। मन ही मन बहुत दुखी हुए की आज पूजा ख़राब होगई।
5 वर्ष के बालक रुप में कबीर साहेब ने उनके मन की बात को जानकर रामानंद जी को कहा कि, स्वामी जी माला की गांठ खोलकर माला पहना दो, फिर गांठ लगा दो।मुकुट नहीं उतारना पड़ेगा।
---------------------------–----
कबीर परमेश्वर ने 600 वर्ष पूर्व सतगुरु की भूमिका कर तत्वज्ञान समझाया था।
उन्होंने बताया था की ब्रह्मा, विष्णु, महेश नाशवान है इनकी भी जन्म व् मृत्यु होती है।(प्रमाण पवित्र श्रीमद्देवीमहापुराण तीसरा स्कंद पृष्ठ नं. 114 से 123)
ये त्रिदेव सिर्फ कर्म का फल प्रदान कर सकते है जन्म मृत्यु का रोग समाप्त नहीं कर सकते।
।।।।।।।।।।।।।💫।।।।।।।।।
*"गुण तीनों की भक्ति में, भूल परो संसार। कहै कबीर निज नाम बिन, कैसे उतरैं पार।।"*
कबीर परमेश्वर ने 600 वर्ष पूर्व यह तत्वज्ञान बताया था की सभी जीव तीनों गुण यानी (रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिवजी) की साधना करके काल जाल व् चौरासी लाख योनियों में फसे है, जब तक पूर्ण संत द्वारा वास्तविक मंत्र नहीं मिलेगा तब तक मोक्ष होना असंभव है।
--------💐---------
कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा सबके पालनहार है, वो चारो युगों में आते हैं। ओर अपना ज्ञान बोल बोल के बताते हैं कवियों की तरह।
🌼🌼🌼🌼👉👉👉
कबीर परमेश्वर अविनाशी स्थान सतलोक में विराजमान है। कबीर साहेब ने अपनी वाणी (सूक्ष्म वेद) में यह ज्ञान दिया था की स्वर्ग व् ब्रह्म लोक तो नाशवान है, इनसे भी ऊपर एक अविनाशी अमर स्थान "सतलोक" है जहाँ जन्म व् मृत्यु नहीं है, कोई दुःख व् बुढ़ापा नहीं है। उस अमर स्थान को सिर्फ पूर्ण गुरु बनाकर कबीर साहेब की सतभक्ति करके ही पाया जा सकता है।
*”कबीर का घर शिखर पर ,जहाँ सिलहली गैल । पांव न टिके पिपीलिका , पंडित लादे बैल ॥"*
600 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर ने अपनी वाणियो में सृष्टि रचना का सम्पूर्ण ज्ञान बताया था, उन्होंने बताया की पहले ब्रह्म (काल) की उत्पत्ति अण्डे से हुई। फिर दुर्गा की उत्पत्ति हुई। दुर्गा के रूप पर आसक्त होकर काल ने छेड़-छाड़ की, तब कबीर जी वहाँ गए दुर्गा की रक्षा करी और काल व् दुर्गा को 21 ब्रह्माण्ड समेत 16 शंख कोस की दूरी पर भेज दिया। काल ने दुर्गा के साथ भोग-विलास किया। इन दोनों के संयोग से ब्रह्मा, विष्णु, शिव की उत्पत्ति हुई। इन्हीं तीनों की ही साधना करके सर्व प्राणी काल जाल में फंसे हैं। जब तक सतगुरु नहीं मिलेगा, पूर्ण मोक्ष होना असंभव है।
भारत के महान संत और आध्यात्मिक कवि स्वयं भगवान थे , और है भी,,,
अनेक प्रमाणिक तथ्यों के साथ सिद्ध करेगे की कबीर जी स्वयं भगवान है, पूरी श्रष्टि के मालिक है, वो अपने आप को छुपाकर रखते है, उनको ज्ञान आधार से पहचाना जा सकता है।।।
इस्लाम के अनुसार ‘कबीर’ का अर्थ महान होता है। कबीर पंथ एक विशाल धार्मिक समुदाय है ।
कबीर पंथ के लोग को कबीर पंथी कहे जाते है जो पूरे उत्तर और मध्य भारत में फैले हुए है। संत कबीर के लिखे कुछ महान रचनाओं में बीजक, कबीर ग्रंथावली, अनुराग सागर, सखी ग्रंथ आदि है। ये स्पष्ट नहीं है कि उनके माता-पिता कौन थे लेकिन ऐसा सुना गया है कि उनकी परवरिश करने वाला कोई बेहद गरीब मुस्लिम बुनकर परिवार था। कबीर बेहद धार्मिक व्यक्ति थे और एक महान सन्त के रूप के जाने जाते है, और भगवान तो वो है ही।।
कबीर जी के दोहे:::::::::--
जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नहीं
सब अंधियाँरा मिट गया, जब दीपक देखया महीन”
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर”
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिला कोय
जो मन देखा आपना, मुझसे बुरा ना कोय”
“गुरु गोविन्द दोहू खड़े, कागे लागू पाँय
बलीहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय”
“सब धरती कागज कारु, लेखनी सब वनराय
सात समुन्द्र की मासी कारु, गुरुगुन लिखा ना जाय”
“ऐसी वानी बोलिये, मन का आपा खोय
औरन को शीतल करुँ, खुद भी शीतल होय”
“निंदक नियरे राखिये, आँगन कुटी छवाय
बिन पानी बिन साबुन, निर्मल करे सुभाय”
“दुख में सिमरन सब करे, सुख में करे ना कोय
जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय”
“माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंधे मोहे
एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रौंधुगी तोहे”
“चलती चक्की देखकर, दिया कबीरा रोय
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोय”
“मालिन आवत देख के, कलियाँ करे पुकार
फूले फूले चुन लिये, काल हमारी बार”
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में परलय होयेगी बहुरी करेगा कब”
“पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय
ढ़ाई अक्षर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय”
“साईं इतना दीजीये, जा में कुटुम्ब समाय
मैं भी भूखा ना रहूँ, साधू ना भूखा जाय”
*रामानंद जी के मन की बात जानना*
रामानंद जी प्रतिदिन विष्णु की मानसिक मूर्ति बनाकर कर्म कांड करके पूजा करते थे। एक दिन वे भगवान विष्णु जी को स्नान कराकर मुकुट पहना दिया और गले में कंठी डालना भूल गए। मन ही मन बहुत दुखी हुए की आज पूजा ख़राब होगई।
5 वर्ष के बालक रुप में कबीर साहेब ने उनके मन की बात को जानकर रामानंद जी को कहा कि, स्वामी जी माला की गांठ खोलकर माला पहना दो, फिर गांठ लगा दो।मुकुट नहीं उतारना पड़ेगा।
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कबीर परमेश्वर ने 600 वर्ष पूर्व सतगुरु की भूमिका कर तत्वज्ञान समझाया था।
उन्होंने बताया था की ब्रह्मा, विष्णु, महेश नाशवान है इनकी भी जन्म व् मृत्यु होती है।(प्रमाण पवित्र श्रीमद्देवीमहापुराण तीसरा स्कंद पृष्ठ नं. 114 से 123)
ये त्रिदेव सिर्फ कर्म का फल प्रदान कर सकते है जन्म मृत्यु का रोग समाप्त नहीं कर सकते।
।।।।।।।।।।।।।💫।।।।।।।।।
*"गुण तीनों की भक्ति में, भूल परो संसार। कहै कबीर निज नाम बिन, कैसे उतरैं पार।।"*
कबीर परमेश्वर ने 600 वर्ष पूर्व यह तत्वज्ञान बताया था की सभी जीव तीनों गुण यानी (रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिवजी) की साधना करके काल जाल व् चौरासी लाख योनियों में फसे है, जब तक पूर्ण संत द्वारा वास्तविक मंत्र नहीं मिलेगा तब तक मोक्ष होना असंभव है।
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कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा सबके पालनहार है, वो चारो युगों में आते हैं। ओर अपना ज्ञान बोल बोल के बताते हैं कवियों की तरह।
🌼🌼🌼🌼👉👉👉
कबीर परमेश्वर अविनाशी स्थान सतलोक में विराजमान है। कबीर साहेब ने अपनी वाणी (सूक्ष्म वेद) में यह ज्ञान दिया था की स्वर्ग व् ब्रह्म लोक तो नाशवान है, इनसे भी ऊपर एक अविनाशी अमर स्थान "सतलोक" है जहाँ जन्म व् मृत्यु नहीं है, कोई दुःख व् बुढ़ापा नहीं है। उस अमर स्थान को सिर्फ पूर्ण गुरु बनाकर कबीर साहेब की सतभक्ति करके ही पाया जा सकता है।
*”कबीर का घर शिखर पर ,जहाँ सिलहली गैल । पांव न टिके पिपीलिका , पंडित लादे बैल ॥"*
600 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर ने अपनी वाणियो में सृष्टि रचना का सम्पूर्ण ज्ञान बताया था, उन्होंने बताया की पहले ब्रह्म (काल) की उत्पत्ति अण्डे से हुई। फिर दुर्गा की उत्पत्ति हुई। दुर्गा के रूप पर आसक्त होकर काल ने छेड़-छाड़ की, तब कबीर जी वहाँ गए दुर्गा की रक्षा करी और काल व् दुर्गा को 21 ब्रह्माण्ड समेत 16 शंख कोस की दूरी पर भेज दिया। काल ने दुर्गा के साथ भोग-विलास किया। इन दोनों के संयोग से ब्रह्मा, विष्णु, शिव की उत्पत्ति हुई। इन्हीं तीनों की ही साधना करके सर्व प्राणी काल जाल में फंसे हैं। जब तक सतगुरु नहीं मिलेगा, पूर्ण मोक्ष होना असंभव है।









