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Wednesday, June 24, 2020

Real knowledge of God Kabir ji

🍁🌸।।कबीर साहेब की जानकारी।। 🍁🌸

भारत के महान संत और आध्यात्मिक कवि स्वयं भगवान थे , और है भी,,,

अनेक प्रमाणिक तथ्यों के साथ सिद्ध करेगे की कबीर जी स्वयं भगवान है, पूरी श्रष्टि के मालिक है, वो अपने आप को छुपाकर रखते है, उनको ज्ञान आधार से पहचाना जा सकता है।।।


 इस्लाम के अनुसार ‘कबीर’ का अर्थ महान होता है। कबीर पंथ एक विशाल धार्मिक समुदाय है ।
कबीर पंथ के लोग को कबीर पंथी कहे जाते है जो पूरे उत्तर और मध्य भारत में फैले हुए है। संत कबीर के लिखे कुछ महान रचनाओं में बीजक, कबीर ग्रंथावली, अनुराग सागर, सखी ग्रंथ आदि है। ये स्पष्ट नहीं है कि उनके माता-पिता कौन थे लेकिन ऐसा सुना गया है कि उनकी परवरिश करने वाला कोई बेहद गरीब मुस्लिम बुनकर परिवार था। कबीर बेहद धार्मिक व्यक्ति थे और एक महान सन्त के रूप के जाने जाते है, और भगवान तो वो है ही।।




कबीर जी के दोहे:::::::::--

जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नहीं
सब अंधियाँरा मिट गया, जब दीपक देखया महीन”
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर”
“बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिला कोय
जो मन देखा आपना, मुझसे बुरा ना कोय”
“गुरु गोविन्द दोहू खड़े, कागे लागू पाँय
बलीहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय”
“सब धरती कागज कारु, लेखनी सब वनराय
सात समुन्द्र की मासी कारु, गुरुगुन लिखा ना जाय”
“ऐसी वानी बोलिये, मन का आपा खोय
औरन को शीतल करुँ, खुद भी शीतल होय”
“निंदक नियरे राखिये, आँगन कुटी छवाय
बिन पानी बिन साबुन, निर्मल करे सुभाय”
“दुख में सिमरन सब करे, सुख में करे ना कोय
जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय”
“माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंधे मोहे
एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रौंधुगी तोहे”
“चलती चक्की देखकर, दिया कबीरा रोय
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा ना कोय”
“मालिन आवत देख के, कलियाँ करे पुकार
फूले फूले चुन लिये, काल हमारी बार”
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में परलय होयेगी बहुरी करेगा कब”
“पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय
ढ़ाई अक्षर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय”
“साईं इतना दीजीये, जा में कुटुम्ब समाय
मैं भी भूखा ना रहूँ, साधू ना भूखा जाय”


*रामानंद जी के मन की बात जानना*
रामानंद जी प्रतिदिन विष्णु की मानसिक मूर्ति बनाकर कर्म कांड करके पूजा करते थे। एक दिन वे भगवान विष्णु जी को स्नान कराकर मुकुट पहना दिया और गले में कंठी डालना भूल गए। मन ही मन बहुत दुखी हुए की आज पूजा ख़राब होगई।
5 वर्ष के बालक रुप में कबीर साहेब ने उनके मन की बात को जानकर रामानंद जी को कहा कि, स्वामी जी माला की गांठ खोलकर माला पहना दो, फिर गांठ लगा दो।मुकुट नहीं उतारना पड़ेगा।



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कबीर परमेश्वर ने 600 वर्ष पूर्व सतगुरु की भूमिका कर तत्वज्ञान समझाया था।
उन्होंने बताया था की ब्रह्मा, विष्णु, महेश नाशवान है इनकी भी जन्म व् मृत्यु होती है।(प्रमाण पवित्र श्रीमद्देवीमहापुराण तीसरा स्कंद पृष्ठ नं. 114 से 123)
ये त्रिदेव सिर्फ कर्म का फल प्रदान कर सकते है जन्म मृत्यु का रोग समाप्त नहीं कर सकते।


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*"गुण तीनों की भक्ति में, भूल परो संसार। कहै कबीर निज नाम बिन, कैसे उतरैं पार।।"*
कबीर परमेश्वर ने 600 वर्ष पूर्व यह तत्वज्ञान बताया था की सभी जीव तीनों गुण यानी (रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिवजी) की साधना करके काल जाल व् चौरासी लाख योनियों में फसे है, जब तक पूर्ण संत द्वारा वास्तविक मंत्र नहीं मिलेगा तब तक मोक्ष होना असंभव है।


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कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा सबके पालनहार है, वो चारो युगों में आते हैं। ओर अपना ज्ञान बोल बोल के बताते हैं कवियों की तरह।
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 कबीर परमेश्वर अविनाशी स्थान सतलोक में विराजमान है। कबीर साहेब ने अपनी वाणी (सूक्ष्म वेद) में यह ज्ञान दिया था की स्वर्ग व् ब्रह्म लोक तो नाशवान है, इनसे भी ऊपर एक अविनाशी अमर स्थान "सतलोक" है जहाँ जन्म व् मृत्यु नहीं है, कोई दुःख व् बुढ़ापा नहीं है। उस अमर स्थान को सिर्फ पूर्ण गुरु बनाकर कबीर साहेब की सतभक्ति करके ही पाया जा सकता है।

*”कबीर का घर शिखर पर ,जहाँ सिलहली गैल । पांव न टिके पिपीलिका , पंडित लादे बैल ॥"*

 600 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर ने अपनी वाणियो में सृष्टि रचना का सम्पूर्ण ज्ञान बताया था, उन्होंने बताया की पहले ब्रह्म (काल) की उत्पत्ति अण्डे से हुई। फिर दुर्गा की उत्पत्ति हुई। दुर्गा के रूप पर आसक्त होकर काल ने छेड़-छाड़ की, तब कबीर जी वहाँ गए दुर्गा की रक्षा करी और काल व् दुर्गा को 21 ब्रह्माण्ड समेत 16 शंख कोस की दूरी पर भेज दिया। काल ने दुर्गा के साथ भोग-विलास किया। इन दोनों के संयोग से ब्रह्मा, विष्णु, शिव की उत्पत्ति हुई। इन्हीं तीनों की ही साधना करके सर्व प्राणी काल जाल में फंसे हैं। जब तक सतगुरु नहीं मिलेगा, पूर्ण मोक्ष होना असंभव है।

Monday, June 1, 2020

Miracles Of GodKabir

            कबीर साहेब के अद्धभुत चमत्कार
  कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा है, उन्होंने अपने जीवन काल मे बहुत चमत्कार किये।
सभी को तत्वज्ञान देकर सतभक्ति से परिचित करवाया।
               4दिन बाद कबीरप्रकटदिवस हैं
                                 👇

शिशु रूप में कबीर देव द्वारा कुँवारी गाय का दूध पीना

जब बालक कबीर को दूध पिलाने की कोशिश में नीरू नीमा असफल रहे। तब कबीर साहेब ने कहा कुँवारी गाय ले आओ मैं उसका दूध पीऊँगा। ऐसा ही हुआ।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है तब कुँवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।


शिशु कबीर परमेश्वर का नामांकन
जब कबीर साहेब का नाम रखने के लिए कुरान शरीफ पुस्तक को काज़ी ने खोला। प्रथम नाम ‘‘कबीरन्’’ लिखा था। काजियों ने सोचा इस छोटे जाति वाले का कबीर नाम रखना शोभा नहीं देगा। पुनः कुरान शरीफ खोली तो उसमें सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले मैं कबीर अल्लाह अर्थात् अल्लाहु अकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
सकल कुरान कबीर है, हरफ लिखे जो लेख।
काशी के काजी कहै, गई दीन की टेक।।


मृत गऊ को जीवित करना
सिकंदर लोधी ने एक गऊ के तलवार से दो टुकड़े कर दिये। गऊ को गर्भ था और बच्चे के भी दो टुकड़े हो गए। 
तब सिकंदर लोधी राजा ने कहा कि कबीर, यदि तू खुदा है तो इस गऊ को जीवित कर दे अन्यथा तेरा सिर भी कलम कर (काट) दिया जाएगा। साहेब कबीर ने एक बार हाथ गऊ के दोनों टुकड़ों को लगाया तथा दूसरी बार उसके बच्चे के टुकड़ों को लगाया। उसी समय दोनों माँ-बेटा जीवित हो गए। साहेब कबीर ने गऊ से दूध निकाल कर बहुत बड़ी देग (बाल्टी) भर दी
तथा कहा - 
गऊ अपनी अम्मा है, इस पर छुरी न बाह। 
गरीबदास घी दूध को, सब ही आत्म खाय।।
चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिवाई बेगि।
गरीबदास दूझन लगी, दूध भरी है देग।।

सेउ की कटी हुई गर्दन को जोड़ना
परमात्मा कबीर ने अपने भक्त की कटी हुई गर्दन वापिस जोड़ दी थी।
 आओ सेउ जीम लो,यह प्रसाद प्रेम।
 सिर कटते हैं चोरों के,साधों के नित्य क्षेम।।
 ऐसी-2 बहुत लीलाएँ साहेब कबीर (कविरग्नि) ने की हैं जिनसे यह स्वसिद्ध है कि ये ही पूर्ण परमात्मा हैं। सामवेद संख्या नं. 822 तथा ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 162 मंत्र 2 में कहा है कि कविर्देव अपने विधिवत् साधक साथी की आयु बढ़ा देता है।

काशी का अद्भुत भंडारा

 शेखतकी मुस्लिम पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी जगह झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी तीन दिन का भंडारा करेंगे, सभी आना। भोजन के बाद एक मोहर, एक दोहर भी देंगे। कबीर साहेब ने तीन दिन का मोहन भंडारा कराया और लाखों की संख्या में उनके अनुयायी हुए।

                       
                     गोरखनाथ से गोष्ठी
एक बार कबीर परमेश्वर जी और गोरखनाथ जी की गोष्ठी हुई। गोरखनाथ जी गंगा नदी की ओर चल पड़ा। उसमें जा कर छलांग लगाते हुए कबीर जी से कहा कि मुझे ढूंढ दो मैं आपका शिष्य बन जाऊँगा। गोरखनाथ मछली बन कर गए। कबीर साहेब ने उसी मछली को पानी से बाहर निकाल कर सबके सामने गोरखनाथ बना दिया। तब गोरखनाथ कबीर जी के शिष्य बने।

               भैंसे से वेद मन्त्र बुलवाना
एक समय तोताद्रि नामक स्थान पर सत्संग था। सत्संग के पश्चात भण्डारा शुरू हुआ। भंडारे में भोजन करने वाले व्यक्ति को वेद के चार मन्त्र बोलने पर प्रवेश मिल रहा था। कबीर साहेब की बारी आई तब थोड़ी सी दूरी पर घास चरते हुए भैंसे को हुर्रर हुर्रर करते हुए बुलाया। तब कबीर जी ने भैंसे की कमर पर थपकी लगाई और कहा कि भैंसे इन पंडितों को वेद के चार मन्त्र सुना दे। भैंसे ने छः मन्त्र सुना दिए।
         
सिकंदर लोधी बादशाह के जलन का असाध्य रोग ठीक करना
कबीर परमेश्वर जी ने दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी के जलन का असाध्य रोग आशीर्वाद मात्र से ठीक कर दिया। वह रोग जो किसी काजी, मुल्ला के जंत्र-मंत्र से भी ठीक नहीं हुआ था।

कबीर जी द्वारा स्वामी रामानन्द के मन की बात बताना
 स्वामी रामानंद जी विष्णु जी की काल्पनिक मूर्ति बनाकर मानसिक पूजा करते थे। एक समय ठाकुर की मूर्ति पर माला डालनी भूल गए। तब कबीर परमात्मा जो कि 5 वर्ष के बालक की लीला कर रहे थे बोले कि माला की गांठ खोल कर गले में डाल दो स्वामी जी, पूजा खंडित नहीं होगी। तब रामानंद जी जो पर्दे के भीतर मन में पूजा कर रहे थे, कबीर परमात्मा को सबके सामने गले लगा लिया।
मन की पूजा तुम लखी मुकुट माल परवेश। 
गरीबदास गति कौ लखै, कौन वरण क्या भेष।।

अधिक जानकारी के लिए देखे जी साधना चैनल 7.30pm
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Sunday, May 31, 2020

52_Cruelities_On_GodKabir

             5जून कबीर प्रकट दिवस
                   
 कबीर परमेश्वर ने बहुत अद्धभुत लीला की अपने जीवन काल मे जिससे उनकी महिमा होने लगी चारो ओर,इस कारण उस समय के धर्मगुरु ओर बादशाह लोग चिढ़ने लग गए और कबीर साहिब को मारने के लिए कई षडयंत्र रचे
मुस्लिम धर्म का एक शेखतकी सिकन्दर लोदी का धर्मगुरु था उसने बहुत कोशिश की कबीर जी को मरवाने की 52 बार हथकण्डे अपनाये पर निष्फल रहा।
कबीर जी तो समर्थ भगवान थे उनको कौन मार सकता हैं,अविनासी परमात्मा है।


परमात्मा कबीर जी की महिमा से अनजान दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोदी ने गर्भवती गाय के दो टुकड़े किये और कबीर जी से उसे जिंदा करने के लिए कहा। परमेश्वर कबीर जी ने बच्चे और गाय दोनों को तुरंत जिंदा कर दिया।

जीवन रक्षक भगवान कबीर
परमात्मा अपने भक्तों की आयु भी बढ़ा देता है । प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 और
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ने लाखों लोगों के बीच में एक मरे हुए लड़के को जिंदा कर दिया था। लोगों ने कहा कबीर जी ने कमाल कर दिया। इसलिए कबीर साहेब ने उस लड़के का नाम कमाल रख दिया था।

सर्वशक्तिमान परमात्मा कबीर साहेब हैं
 वेदों में प्रमाण है कि कबीर परमात्मा अपने साधक के हर संकटों को एक क्षण में दूर कर सकता है।
परमात्मा उसी को कहते हैं जो साधक के सर्व पाप नाश करके उसकी आयु बढ़ा सके। ऐसा केवल कबीर परमात्मा ही कर सकते हैं क्योंकि वही समर्थ परमात्मा हैं।
 जिसका प्रमाण सभी धर्म शास्त्रों में है और वह परमात्मा अपने साधक के हर संकटों को एक क्षण में दूर कर सकता है।

कबीरपरमेश्वर_के_साथ_52बदमाशी 
की शेखतकी ने ओर अनेक षडयंत्र रचे उनको मारने के लिए।
राजा सिकंदर लोधी द्वारा ढेरो परीक्षा लेने पर जब समर्थ भगवान कबीर जी का बाल भी बाका नहीं हुआ तो, सिकंदर लोधी ने कहा था-
"आप कबीर अल्लाह हैं, बख्सो इबकी बार। दासगरीब शाह कुं, अल्लाह रूप दीदार।।"

हे कबीर जी आप वास्तव में अल्लाह हो। मुझे क्षमा करो।



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Saturday, May 30, 2020

🌹कबीर प्रकट दिवस :-5 जून 🌹


      मगहर में लीला कबीर परमेश्वर की
कबीर जी का काशी में कमल के फूल पर प्रकट होना फिर अंतिम समय मे सशरीर सतलोक जाना
                  सशरीर आते हैं वो पूर्ण परमात्मा
            राम और अल्लाह एक ही हैं!
600 साल पहले कबीर साहेब ने मगहर में शरीर छोड़ने से पहले सभी लोगो को अपना ज्ञान समझाते हुए कहा कि राम और अल्लाह एक ही हैं सभी धर्मों के लोग एक परमपिता की संतान है।
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कबीर परमेश्वर अनेक लीला करते हुए बड़े होते हैं
ओर अपने जीवनकाल में बहुत सी लीला करते हैं
मगहर में परमात्मा का चमत्कार!
कबीर परमेश्वर जी के अद्भुत चमत्कार जैसे अकाल से बचाना, सूखी आमी नदी बहाना, सशरीर सतलोक जाना आदि देखकर तथा उनके‌ द्वारा दिए तत्वज्ञान का‌ अनुसरण करके मगहर के सर्व हिंदू-मुसलमान आज भी विशेष प्रेम से रहते हैं। आज तक उनकी धर्म के नाम पर कोई लड़ाई नहीं हुई।

अन्तिम समय मे मगहर की लीला
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मगहर में भाईचारे की मिसाल!
हिन्दू व मुसलमानों के बीच धार्मिक सामंजस्य और भाईचारे की जो विरासत कबीर परमात्मा छोड़कर गए हैं उसे मगहर में आज भी जीवंत रूप में देखा जा सकता है।
मगहर में जहाँ कबीर परमेश्वर जी सशरीर सतलोक गए थे, वहां हिंदू-मुसलमानों के मंदिर और मजार 100-100 फुट की दूरी पर बने हुए हैं।
"कबीर, विहंसी कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
हिन्दू तुरक नहीं हो, ऐसा वचन हमार।"
मगहर लीला
आदरणीय गरीबदास जी महाराज ने परमात्मा कबीर साहेब की मगहर लीला(सशरीर सतलोक गमन) का वर्णन करते हुए कहा है कि,
"देख्या मगहर जहूरा सतगुरु, कांशी मैं कीर्ति कर चाले, झिलमिल देही नूरा हो।।

कबीर, क्या काशी क्या ऊसर मगहर, राम हृदय बस मोरा।
जो कासी तन तजै कबीरा, रामे कौन निहोरा।।
मगहर में मरने वाला गधा बनता है इस भ्रम का खंडन करते हुए कबीर परमात्मा ने बताया कि जिसके हृदय में परमात्मा का वास हैं वह चाहे काशी में मरे या मगहर में उसकी मुक्ति निश्चित है।
यदि काशी में तन छोड़ने से मुक्ति होती है तो भगवान को भजने की क्या आवश्यकता थी?

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Thursday, May 7, 2020

तत्वदर्शी सन्त की पहचान


पूर्ण सन्त के लक्षण
पूर्ण संत सर्व वेद-शास्त्रों का ज्ञाता होता है।
दूसरे वह मन-कर्म-वचन से यानि सच्ची श्रद्धा से केवल एक परमात्मा समर्थ की भक्ति स्वयं करता है तथा अपने अनुयाईयों से करवाता है।
तीसरे वह सब अनुयाईयों से समान व्यवहार (बर्ताव) करता है।
चौथे उसके द्वारा बताया भक्ति
कर्म वेदों में वर्णित विधि के अनुसार होता है।
पूर्ण_सन्त के बिना मुक्ति नही हो सकती है।

संत गरीब दास जी कहते हैं-
साध हमारे सगे हैं, ना काहू को दोष।
जो सारनाम बतावहीँ, सो साधु सिर पोष।।
कृपया समय रहते पूर्ण संत की शरण में आएं।
कबीर, अक्षर पुरूष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार। तीनों देवा शाखा हैं, पात रूप संसार।।
जैसे पौधे को मूल की ओर से पृथ्वी में रोपण करके मूल की सिंचाई की जाती है तो
उस मूल परमात्मा (परम अक्षर ब्रह्म) की पूजा से पौधे की परवरिश होती है। सब तना, डार,
शाखाओं तथा पत्तों का विकास होकर पेड़ बन जाता है। छाया, फल तथा लकड़ी सर्व प्राप्त
होती है जिसके लिए पौधा लगाया जाता है। यदि पौधे की शाखाओं को मिट्टी में रोपकर
जड़ों को ऊपर करके सिंचाई करेंगे तो भक्ति रूपी पौधा नष्ट हो जाएगा। इसी प्रकार एक
मूल (परम अक्षर ब्रह्म) रूप परमेश्वर की पूजा करने से सर्व देव विकसित होकर साधक को
बिना माँगे फल देते रहेंगे।(जिसका वर्णन गीता अध्याय 3 श्लोक 10 से 15 में भी है) इस
प्रकार ज्ञान होने पर साधक का प्रयोजन उसी प्रकार अन्य देवताओं से रह जाता है जैसे
झील की प्राप्ति के पश्चात् छोटे जलाशय में रह जाता है। छोटे जलाशय पर आश्रित को ज्ञान
होता है कि यदि एक वर्ष बारिश नहीं हुई तो छोटे तालाब का जल समाप्त हो जाएगा। उस
पर आश्रित भी संकट में पड़ जाऐंगे। झील के विषय में ज्ञान है कि यदि दस वर्ष भी बारिश
न हो तो भी जल समाप्त नहीं होता। वह व्यक्ति छोटे जलाशय को छोड़कर तुरंत बड़े
जलाशय पर आश्रित हो जाता है। भले ही छोटे जलाशय का जल पीने में झील के जल जैसा
ही लाभदायक है, परंतु पर्याप्त व चिर स्थाई नहीं है। इसी प्रकार अन्य देवताओं (रजगुण
ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शिव जी) की भक्ति से मिलने वाले स्वर्ग का सुख
बुरा नहीं है, परंतु क्षणिक है, पर्याप्त नहीं है। इन देवताओं तथा इनके अतिरिक्त किसी भी
देवी-देवता, पित्तर व भूत पूजा करना गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15, 20 से 23 तथा
अध्याय 9 श्लोक 25 में मना किया है। इसलिए भी इनकी भक्ति करना शास्त्र विरूद्ध होने
से व्यर्थ है जिसका गीता अध्याय 16 श्लोक 23.24 में प्रमाण है। कहा है कि शास्त्र विधि को
त्यागकर मनमाना आचरण करने वालों को न तो सुख प्राप्त होता है, न सिद्धि प्राप्त होती
है और न ही परम गति यानि पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होती है अर्थात् व्यर्थ प्रयत्न है।(गीता
अध्याय 16 श्लोक 23)

कबीर,
एकै साधै सब सधै, सब साधें सब जाय। माली सींचे मूल कूँ, फलै फूलै अघाय।।
 पूर्ण_संत से नामदान लेकर परमात्मा की भक्ति करें तब ही इस लोक में शांति मिल सकती है और मोक्ष प्राप्त हो सकता है।
सच्चा सतगुरु वो है जो हमारे सभी धर्मों के सदग्रन्थों से प्रमाणित ज्ञान व सतभक्ति देकर जन्म-मृत्यु से छुटकारा दिला दे।
सद्ग्रन्थों पर आधारित भक्ति केवल संत रामपाल जी महाराज ही बताते हैं।
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Mobile and Society

                मोबाइल और समाज आज आपको यह बताने जा रही हूं की मोबाइल और समाज में क्या समानता और क्या भिन्नता है आखिर मोबाइल से समाज पर क्या ...